Wednesday, June 25, 2014
इस वर्ष मेरा दस वर्षीय बेटे ने , कक्षा ४ में प्रवेश लिया है. पड़ने में कम पर व्यावारिक ज्ञान में हमेशा प्रथम आता है. पिछले दिनों जब मुझे पैसे मिले तो उसकी लिए बहुप्रतीक्षित नयी ड्रेस और जूते दिलवाने के लिए बाज़ार ले कर गया.
बेटे ने जूते लेने से ये कह कर मना कर दिया कि पुराने जूतों को बस थोड़ी सी मरम्मत की जरुरत है अभी वो इस वर्ष भी पहनने के काम आ जायेंगे. अपने जूतों के बजे उसने अपने बाबा के लिए बहुत जरुरी जन्मदिन में घड़ी उपहार में देने की जरुरत समझा रहा है.
खैर मैंने कुछ कहना जरुरी नहीं समझा और उसे लेकर एक ड्रेस की दुकान पर पहुंचा. दुकानदार ने बेटे के साइज़ की सफ़ेद शर्ट निकाली और उसको पहन कर चेक करने को कहा. वो शर्ट बिल्कुल बेटे की नाप की थी, फिर भी बेटे ने थोड़ी बड़ी शर्ट दिखने को कहा !!!!!
मैंने बेटे से कहा ये तो तुम्हे पूरी तरह फिर आ रही है, तो फिर इससे लम्बी क्यें ? बेटे ने कहा :- पापा मुझे ये शर्ट पेंट के अंदर ही डालनी होती है, इसलिए थोड़ी लम्बी होगी तो फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन यही शर्ट मुझे अगले कक्षा में भी काम आ जाएगी. पिछली वाली शर्त भी अभी नयी जैसी है, लेकिन छोटी होने की वजह से ही मैं उससे नहीं पहन पा रहा.
घर आते वक़्त मैंने बेटे से पूछा:- तुम्हे ये सब बाते कौन सिखाता है बेटा ?
बेटे ने जो कहा उससे मेरी आँखों में आसू आ गए. उसने कहा :- पापा मैं अक्सा देखा करता हूँ कि कभी माँ अपनी साड़ी छोड़कर, कभी आप अपने जूतों को छोड़कर हमेशा हमारे लिए किताबो, कपड़ो और खिलौनों पर पैसे मुस्कुरा के खर्च कर दिया करते हो.
गली मोहल्ले, में सब लोग कहते है आप ईमानदार और दानी आदमी है. और हमारे साथ वाले घर के अंकल सब लोग चोर और बेईमान और न जाने क्या क्या कहते है. जबकि आप दोनों एक ही उमर के है और एक जैसा ही काम करते है.
जब सब लोग आप की तारीफ करते है तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है. मम्मी और दादी, बाबा भी आप की बहुत तारीफ करते है. माँ कहती है की तुम्हारे पापा अगर जंगल में भी रहेंगे तो हमें तुम्हे कमा के खिला देंगे.
पापा मैं चाहता हूँ की मुझे कभी जीवन में नए कपडे, खिलौने, जूते मिले न मिले लेकिन कोई आप को चोर, बेईमान या रिश्वतखोर न कहे.
मैं आप की ताकत बनना चाहता हूँ, आप की कमजोरी नहीं.
बेटे की बता सुन कर मुझे लगा की पहली बार मुझे ईमानदारी का इनाम मिला है. आज बहुत दिनों बाद फिर से कोई इनाम जीता है वो भी घर में.
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